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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 54
हिताहितं ना जानन्तो नित्यमुन्मार्गगामिनः । कुक्षिपूरणनिष्ठा ये तेऽबुधा नारकाः प्रिये ॥
हे प्रिये! हित एवं अहित को न जानकर पेट भरने में ही जो अज्ञानी लोग लगे रहते हैं वे नित्य ही उलटे मार्ग पर जाने वाले नरक को नहीं जानते हैं।
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