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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 51
कुटुम्बचिन्तायुक्तस्य श्रुतशीलादयो गुणाः । अपक्वकुम्भजलवत् नश्यन्त्यङ्गेन केवलम् ॥
कुटुम्ब की चिन्ता जिसे है, उसके ज्ञान, शील आदि गुण कच्चे घड़े में रखे हुए जल के समान नष्ट हो जाते हैं।
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