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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 50
लौहदारुमयैः पाशैर्दृढबन्धोऽपि मुच्यते । स्त्रीधनादिषु संसक्तो मुच्यते न कदाचन ॥
लोहे एवं लकड़ी के बने हुए पाश (बन्धन) से छुटकारा सम्भव है। किन्तु स्त्री, धन आदि में लिप्त जीव का कभी भी छूटना सम्भव नहीं है।
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