हे देवि! परब्रह्म-स्वरूप शिव ही सत्य है। वह सर्वज्ञ, सर्वकर्ता, सर्वेश ओर निर्मल एवं अद्वितीय है। वह आदि अन्त से रहित स्वयं ज्योति है तथा निर्विकार, पर से भी परे, निर्गुण ओर सच्चिदानन्द है। सभी जीव संज्ञा वाके उन्हीं शिव के अंश हैं, जो अनादि अविद्या से उपहित (संयुक्त) होकर उनसे उसी प्रकार भिन्न हुए हैं, जैसे कि अग्नि में से चिनगारियां फूट कर अलग होती हैं।
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