मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 4
अस्ति देवि परब्रह्मस्वरूपो निष्कलः शिवः । सर्वज्ञः सर्वकर्ता च सर्वेशो निर्मलोऽद्रयः ॥ स्वयं ज्योतिरनाद्यन्तो निर्विकारः परात्‌ परः । निर्गुणः सच्चिदानन्दस्तदंशा जीवसंज्ञकाः ॥ अनाद्यविद्योपहिता यथाग्नौ विस्पुलिङ्गकाः।
हे देवि! परब्रह्म-स्वरूप शिव ही सत्य है। वह सर्वज्ञ, सर्वकर्ता, सर्वेश ओर निर्मल एवं अद्वितीय है। वह आदि अन्त से रहित स्वयं ज्योति है तथा निर्विकार, पर से भी परे, निर्गुण ओर सच्चिदानन्द है। सभी जीव संज्ञा वाके उन्हीं शिव के अंश हैं, जो अनादि अविद्या से उपहित (संयुक्त) होकर उनसे उसी प्रकार भिन्न हुए हैं, जैसे कि अग्नि में से चिनगारियां फूट कर अलग होती हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें