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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 38
स्वस्ववर्णाश्रमाचारलङ्घनाद् दुष्यतिग्रहात् । परस्त्रीधनलोभाच्व नृणामायुःक्षयो भवेत् ॥
जीवन में आयु क्षय के कारण अपने वर्ण और आश्रम के आचारों का पालन न करने से, अनुचित रूप से प्रतिग्रह (धन धान्यादि का ग्रहण करने) से और पर स्त्री एवं पराये धन की लालसा करने से आयु का नाश होता है।
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