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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 33
श्वः कार्यमद्य कर्तव्यं पूर्वाहृणे चापराहिनकम्‌ । न हि प्रतीक्षते मृत्युः कृतं वाऽस्य न वा कृतम्‌ ॥
जो कल करना है उसे आज ही करना चाहिए और जो शाम को करना है उसे पूर्वाह्ण में ही कर लेना चाहिए क्योकि मृत्यु किसी की प्रतीक्षा नही करती कि इसने क्या किया है या क्या नहीं किया है।
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