अपत्यं मे कलत्रं मे धनं मे बान्धवश्च मे ।
लपन्तमिति मर्त्यं हि हन्ति कालवृको बलात् ॥
वह यही रटता रहता है कि “यह मेरा पुत्र है, यह मेरी पत्नी है, यह मेरा धन है, ये मेरे बन्धु है"। इतने में ही काल रूप भेड़िया आकर बलात् उसे मार डाठता है।
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