पृथिवी दह्यते येन मेरुश्चापि विशीयति ।
शुष्यते सागरजल शरीरे देवि का कथा ॥
हे देवि! प्रलय काल में पृथ्वी जल जाती है और मेरु पर्वत भी टूट जाता है तथा समुद्र का जल भी जब सूख जाता है तो फिर इस नश्वर शरीर की क्या औकात है?
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