मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 28
प्रतिक्षणमयं कायो जीर्यमाणो न -लश््यते । आमकुम्भ इवाम्भःस्थो विशीर्णो नैव भाव्यते ॥
यह शरीर प्रतिक्षण जीर्ण होता जा रहा है जो दिखाई नहीं पड़ता। जिस प्रकार पानी में पड़ा हुआ कच्चे मिटटी का धड़ा प्रति क्षण गलता जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें