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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 23
प्रारब्धव्ये निरुद्योगो जागर्तव्ये सुषुप्तः । विश्वस्तव्यो भयस्थाने घातकः किं न हन्यते ।॥
जो प्रारम्भ करने योग्य समय में निष्क्रिय अथवा प्रारब्ध के बल पर निष्क्रिय रहता है, जागने योग्य समय में सोने वाला और जो भय योग्य (इस संसार) में विश्वास (आश्वस्त) करता है वह घातकों के द्वारा क्यों नहीं मारा जायगा अर्थात्‌ असावधान व्यक्ति तो मारा ही जायगा।
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