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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 22
शतं जीवितमत्यल्पं ॒निद्रा स्यादर्दहारिणी । बाल्यरोगजरादुः खैर्धं॑ तदपि निष्फलम्‌ ॥
मनुष्य का सौ वर्ष का जीवन बहुत कम है क्योकि आधा समय तो निद्रा में बीत जाता है। बचपन, बुढ़ापा और रोगादि में शेष आधा समय बीतता है जो सर्वथा व्यर्थ है।
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