मनुष्य का सौ वर्ष का जीवन बहुत कम है क्योकि आधा समय तो निद्रा में बीत जाता है। बचपन, बुढ़ापा और रोगादि में शेष आधा समय बीतता है जो सर्वथा व्यर्थ है।
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