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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 21
सम्पदः स्वप्नसङ्काशा यौवन कुसुमोपमम्‌ । तडिच्चञ्चलमायुश्च कस्य स्याज्जगतो धृतिः ॥
सम्पत्ति स्वप्न के समान मिथ्या है, यौवन फूल के समान मुरझा जाने वाला है। आयु बिजली के समान क्षणभंगुर है फिर कौन शाश्वत है?
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