अज्ञान रूपी मदिरा को पीने के कारण जड़ बुद्धि एवं आर्त जन, क्षुधा-तृष्णा से व्याकुल, मरते हुये और अन्य आपत्ति मेँ पड़े हुए अत्यन्त दुःखी जीवों को देखकर भी कभी भय नहीं लगता है।
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