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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 19
कालो न ज्ञायते नानाकार्यैः ससारसम्भवैः । सुखदुःखरतो जन्तुर्न वेत्ति हितमात्मनः ॥
संसार के नाना प्रकार के कर्मो मे फंसे रहने के कारण काल के बीत जाने का ज्ञान ही नहीं रहता। सुख एवं दुःख में फंसा हआ जीव अपने हित को सोच भी नहीं पाता।
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