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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 18
यावन्नाश्रयते दुःखं यावनायान्ति चापदः । यावनेन्धियवैकल्यं तावच्छेयः समाचरेत्‌ ॥
जब तक दुःख नहीं आते और जब तक विपत्ति नहीं आती अथवा जब तक इंद्रियाँ अपंग नहीं हो जातीं उसके पहले ही श्रेय का कार्य करते रहना चाहिए।
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