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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 15
इहैव नरकव्याधेश्चिक्ित्सा न करोति यः। गत्वा निरौषधं स्थानं व्याधिस्थः कि करिष्यति ॥
इस संसार मे रहकर ही जो नरक रूपी व्याधि से अपनी चिकित्सा नहीं करता है वह व्याधिग्रस्त मनुष्य बिना ओषधि के फिर अन्य स्थान को जाकर क्या करेगा?
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