मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 14
आत्मैव यदि नात्मानमहितेभ्यो निवारयेत्‌ । कोऽन्यो हितकरस्तस्मादात्मानं तारयिष्यति ॥
अहितकारी (सांसारिक तृष्णादि से) यदि मनुष्य अपने से ही अपने को निकालने का साधन न खोजे तो उसके लिए अन्य हितकारी जन कौन है जो भवसागर से उसे मुक्त कराएगा?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें