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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 12
पुनग्रमाः पुनः क्षेत्र पुनर्वित्तं पुनर्गृहम्‌ । पुनः शुभाशुभं कर्म न शरीरं पुनः पुनः ॥
ग्राम, भूमि, धन और गृह तथा शुभ एवं अशुभ कर्म तो बार बार प्राप्त किये जा सकते हैं किन्तु मनुष्य शरीर पुनः पुनः (बार - बार) नहीं प्राप्त होता।
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