इस कारण सभी प्रकार से प्रयत्नो द्वारा मनुष्य को अपने आत्मा की रक्षा करनी चाहिए। वस्तुतः आत्मा ही सभी वस्तुओं की प्राप्ति का साधन है। इसीलिए मनुष्य को चाहिए कि वह सभी प्रकार से तब तक अपने आत्मा की रक्षा करे, जब तक तत्त्वज्ञान न हो जाय।
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