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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 101
तस्माद्वदामि तत्त्वन्ते विज्ञाय श्रीगुरोर्मुखात् । सुखेन मुच्यते देवि घोरसंसारबन्धनात् ॥
अतएव मैं गुरुमुख से उस तत्त्व को जानकर आपसे कहता हूँ, जिससे हे देवि! इस घोर संसार के बन्धन से जीव सहज ही मुक्त हो जाता है।
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