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कुलार्णव • अध्याय 1 • श्लोक 100
बहुनात्र किंमुक्तेन रहस्यं शृणु पार्वति । कुलधर्ममृते मुक्तर्नास्ति सत्यं न संशयः ॥
हे पार्वति! अधिक कहने से क्या लाभ? रहस्य की बात सुनिए। कुलधर्म के सिवा मुक्ति नहीं है, यह सत्य है, इसमें सन्देह नहीं है।
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