इसके बाद नाभि प्रदेश में प्राणों की धारणा करे। (कटि प्रदेश से नीचे का भाग, जो मूलाधार एवं स्वाधिष्ठान चक्रों से सम्बद्ध उसमें प्राण-प्रवाह की धारणा स्थिर होने के बाद क्रमशः नाभि, हृदय, कण्ठ एवं उससे ऊपर मन-बुद्धि (आज्ञा-सहरू आदि) तक प्राण-प्रवाह द्वारा धारणा को दूढ़ करने का संकेत आगे के मंत्रों में किया गया है)
पूरा ग्रंथ पढ़ें
क्षुरिक के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।