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क्षुरिक • अध्याय 1 • श्लोक 21
तपोविजितचित्तस्तु निःशब्दं देशमास्थितः । निःसङ्गस्तत्त्वयोगज्ञो निरपेक्षः शनैः शनैः ॥
जिस व्यक्ति ने तप के द्वारा अपने चित्त को जीत लिया है, वह व्यक्ति शब्दरहित, एकान्त, निर्जन स्थान में स्थित होकर निःसङ्ग तत्त्व के योग का अभ्यास करे तथा शनैः शनैः निरपेक्ष हो जाए।
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