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क्षुरिक • अध्याय 1 • श्लोक 17
तयोर्मध्ये वरं स्थानं यस्तं वेद स वेद‌वित्। द्वासप्ततिसहस्त्राणि प्रति नाडीषु तैतिलम् ॥
इन (इड़ा एवं पिङ्गला) दोनों नाड़ियों के मध्य में जो श्रेष्ठ स्थान है, उसे जो जानता है, वह वेद (अर्थात् शाश्वत ज्ञान) को जानने में समर्थ होता है। सभी सूक्ष्म नाड़ियों की संख्या बहत्तर हजार बतायी गयी है, जिन्हें तैतिल कहा गया है।
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