पादस्योपरि यन्मर्म तद्रूपं नाम चिन्तयेत्।
मनोद्वारेण तीक्ष्णेन योगमाश्रित्य नित्यशः ॥
इस प्रकार पैरों के ऊपर जो मर्म स्थान हैं, उनके नाम-रूप का चिन्तन करे। नित्य योगाभ्यास का आश्रय लेकर तीक्ष्ण मन के द्वारा जंघाओं से लगा हुआ-
पूरा ग्रंथ पढ़ें
क्षुरिक के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।