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क्षुरिक • अध्याय 1 • श्लोक 12
पादस्योपरि यन्मर्म तद्रूपं नाम चिन्तयेत्। मनोद्वारेण तीक्ष्णेन योगमाश्रित्य नित्यशः ॥
इस प्रकार पैरों के ऊपर जो मर्म स्थान हैं, उनके नाम-रूप का चिन्तन करे। नित्य योगाभ्यास का आश्रय लेकर तीक्ष्ण मन के द्वारा जंघाओं से लगा हुआ-
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