उसकी प्रतिष्ठा(आधार) है—तप(आत्मसंयम), दम(इन्द्रिय-निग्रह) और कर्म(नियत कर्तव्य)। वेद इसके सर्वाङ्ग(सम्पूर्ण अंग) हैं, और सत्य इसका आयतन(आश्रय) है।
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