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केन • अध्याय 4 • श्लोक 6
तद्ध तद्वनं नाम तद्वनमित्युपासितव्यं स य एतदेवं वेदाभि हैनम् सर्वाणि भूतानि संवाञ्छन्ति॥
वह (ब्रह्म) ‘तद्वन’ (आनन्द) नाम से जाना जाता है; इसलिए उसे ‘तद्वन’ के रूप में उपासना करनी चाहिए। जो मनुष्य इस प्रकार (ब्रह्म को) जानता है, उसके प्रति सभी प्राणी स्वयं ही आकर्षित (प्रेम/आकर्षण) होते हैं।
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