मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
केन • अध्याय 4 • श्लोक 6
तद्ध तद्वनं नाम तद्वनमित्युपासितव्यं स य एतदेवं वेदाभि हैनम् सर्वाणि भूतानि संवाञ्छन्ति॥
वह “तद्वन” (वह उपास्य ब्रह्म) कहलाता है। उसका “तद्वन” नाम से ही उपासना करनी चाहिए। जो पुरुष इस प्रकार तद्वन ब्रह्म को जानता है, उसके प्रति समस्त प्राणी आकर्षित होते हैं और उसे मान-सम्मान प्राप्त होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
केन के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

केन के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें