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केन • अध्याय 4 • श्लोक 5
अथाध्यात्मं यद्देतद् गच्छतीव च मनोऽनेन चैतदुपस्मरत्यभीक्श्णं सङ्कल्पः ॥
अब (उस ब्रह्म का) अध्यात्म (आंतरिक) दृष्टि से यह उपदेश है — जैसे मन उस (ब्रह्म) की ओर जाता हुआ प्रतीत होता है, और इसी के द्वारा मन बार-बार उसका स्मरण करता है — यही संकल्प (चेतन प्रयास) है।
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