अथाध्यात्मं यद्देतद् गच्छतीव च मनोऽनेन चैतदुपस्मरत्यभीक्श्णं सङ्कल्पः ॥
अब अध्यात्म की दृष्टि से यह समझना चाहिए कि मन मानो कहीं गमन करता हुआ प्रतीत होता है, और उसी के द्वारा यह वस्तुओं का बार-बार स्मरण करता है; तथा इसमें संकल्प(निश्चयात्मक विचार) की भूमिका होती है।
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