मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
केन • अध्याय 4 • श्लोक 2
तस्माद्वा एते देवा अतितरामिवान्यान्देवान्यदग्निर्वायुरिन्द्रस्ते ह्येनन्नेदिष्ठं पस्पर्शुस्ते ह्येनत्प्रथमो विदाञ्चकार ब्रह्मेति ॥
इसी कारण ये देवता (अग्नि, वायु और इन्द्र) अन्य देवताओं से श्रेष्ठ माने जाते हैं — क्योंकि इन्होंने उस (ब्रह्म) का अधिक निकट से स्पर्श किया था; और इनमें भी इन्द्र ने सबसे पहले उसे (ब्रह्म को) जान लिया था।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
केन के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

केन के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें