तदभ्यद्रवत्तमभ्यवदत् कोऽसीति वायुर्वा अहमस्मीत्यब्रवीन्मातरिश्वा वा अहमस्मीति ॥
तब वायु उस यक्ष के पास गए। यक्ष ने उनसे पूछा—"तुम कौन हो?"
वायु ने उत्तर दिया—"मैं वायु हूँ।" फिर उन्होंने कहा—"मैं मातरिश्वा हूँ"(अर्थात् आकाश में गति करने वाला वायु)।
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