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केन • अध्याय 3 • श्लोक 11
अथेन्द्रमब्रुवन् मघवन्नेतद्विजानीहि किमेतद्यक्शमिति तथेति तदभ्यद्रवत् तस्मात्तिरोदधे ॥
तब उन्होंने इन्द्र से कहा— ‘हे मघवन् (इन्द्र), तुम यह जानो कि यह यक्ष क्या है।’ इन्द्र ने कहा — ‘ठीक है।’ वह उसके पास गया, लेकिन उसके पहुँचते ही वह (यक्ष) अदृश्य हो गया।
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