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केन • अध्याय 3 • श्लोक 10
तस्मै तृणं निदधावेतदादत्स्वेति तदुपप्रेयाय सर्वजवेन तन्न शशाकादातुं स तत एव निववृते नैतदशकं विज्ञातुं यदेतद्यक्शमिति ॥
उस (यक्ष) ने उसके सामने एक तिनका रख दिया और कहा — ‘इसे उठा लो।’ वायु पूरी गति से उसकी ओर बढ़ा, पर वह उसे उठा न सका। तब वह वहीं से लौट आया और (देवताओं से कहा) — ‘मैं यह नहीं जान सका कि यह यक्ष क्या है।’
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