ब्रह्म ने देवताओं के लिए विजय प्राप्त की।
उस ब्रह्म की उस विजय से देवता अत्यंत गौरवान्वित (अभिमानी) हो गए।
उन्होंने सोचा—
‘यह विजय हमारी ही है, यह महिमा हमारी ही है।
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