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केन • अध्याय 2 • श्लोक 5
इह चेदवेदीदथ सत्यमस्ति। न चेदिहावेदीन्महती विनष्टिः। भूतेषु भूतेषु विचित्य धीराः। प्रेत्यास्माल्लोकादमृता भवन्ति ॥
यदि यहाँ (इस जीवन में) उसे जान लिया, तो यही सत्य (जीवन की सिद्धि) है; और यदि यहाँ नहीं जाना, तो महान विनाश है। ज्ञानी पुरुष सभी प्राणियों में उसी (आत्मा/ब्रह्म) को भली-भाँति पहचानकर, इस संसार से परे जाकर अमर हो जाते हैं।
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