मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
केन • अध्याय 2 • श्लोक 5
इह चेदवेदीदथ सत्यमस्ति। न चेदिहावेदीन्महती विनष्टिः। भूतेषु भूतेषु विचित्य धीराः। प्रेत्यास्माल्लोकादमृता भवन्ति ॥
यदि मनुष्य इस जीवन में ही ब्रह्म को जान लेता है, तो उसका जीवन सार्थक हो जाता है; और यदि वह इस जीवन में उसे नहीं जान पाता, तो यह महान् हानि है। धीर पुरुष (तत्त्वदर्शी) समस्त प्राणियों में उसी एक आत्मतत्त्व का विवेकपूर्वक दर्शन करके, इस संसार से मुक्त होकर अमृतत्व (मोक्ष) को प्राप्त हो जाते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
केन के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

केन के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें