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केन • अध्याय 2 • श्लोक 4
प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते। आत्मना विन्दते वीर्यं विद्यया विन्दतेऽमृतम्‌ ॥
प्रत्येक बोध (ज्ञान-अनुभूति) में जो ज्ञात होता है, वही (ब्रह्म) सम्यक् ज्ञात है; क्योंकि उसी के द्वारा अमरत्व प्राप्त होता है। मनुष्य आत्मा के द्वारा शक्ति (सामर्थ्य) प्राप्त करता है, और विद्या (सच्चे ज्ञान) के द्वारा अमरत्व प्राप्त करता है।
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