प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते।
आत्मना विन्दते वीर्यं विद्यया विन्दतेऽमृतम् ॥
प्रत्येक बोध(प्रत्येक ज्ञान-वृत्ति और अनुभूति) में जिसके द्वारा चैतन्य का प्रकाश जाना जाता है, उसी का यथार्थ ज्ञान है; क्योंकि उसी के द्वारा मनुष्य अमृतत्व(मोक्ष) को प्राप्त करता है।
मनुष्य आत्मा के द्वाराबल(आध्यात्मिक सामर्थ्य) प्राप्त करता है, और विद्या(आत्मज्ञान) के द्वारा अमृतत्व को प्राप्त करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
केन के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।