जिसे प्राण प्राणित (जीवित अथवा संचालित) नहीं कर सकता, किन्तु जिसकी शक्ति से प्राण संचालित होता है, उसी को तू ब्रह्म जान; यह नहीं, जिसकी लोग उपासना(सीमित और उपाधियुक्त रूप में) करते हैं।
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