जो कान का भी कान है, मन का भी मन है, वाणी की भी वाणी है, वही प्राण का भी प्राण है, और आँखों का भी आँख है।
उस (तत्त्व) को जानकर ज्ञानी पुरुष (धीर लोग) इंद्रियों के बंधन से मुक्त होकर इस संसार से परे जाकर अमर हो जाते हैं।
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