मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कौषीतकिब्राह्मण • अध्याय 4 • श्लोक 16
स होवाच बालाकिर्य एवैष दक्षिणेऽक्षन्पुरुषस्तमेवाहमुपास इति तं होवाचा-जातशत्रुर्मा मैतस्मिन्संवादयिष्ठा नाप्न आत्माऽग्नेरात्मा ज्योतिष आत्मेति वा अहमेतमुपास इति स यो हैतमेवमुपास्त एतेषां सर्वेषामात्मा भवति ॥
पुनः गार्ग्य जो ने कहा - 'हे राजन्! जो यह दाहिने नेत्र में विराट् पुरुष स्थित है, मैं उसी की ब्रह्मरूप में उपासना करता हूँ।' ऐसा गार्ग्य ऋषि से सुनकर राजा अजातशत्रु ने कहा - 'हे ब्रह्मन्! कृपया आप इस विषय में कुछ भी न कहें।' यह नाम, अग्रि एवं ज्योति की आत्मा है। इसकी मैं इसी भावना के अनुसार उपासना करता हूँ।' इसी तरह से जो भी उपासक इसकी उपासना करता है, वह इन सभी की आत्मा के समान हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कौषीतकिब्राह्मण के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कौषीतकिब्राह्मण के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें