एतद्वै ब्रह्म दीप्यते यद्वाचा वदत्यथैतन्प्रियते यन्त्र वदति तस्य चक्षुरेव तेजो गच्छति प्राणं प्राण एतद्वै ब्रह्म दीप्यते यच्च्चक्षुषा पश्यत्यथैतन्प्रियते यन्न पश्यति तस्य श्रोत्रमेव तेजो गच्छति प्राणं प्राण एतद्वै ब्रह्म दीप्यते यच्छ्रोत्रेण शृणोत्यथैतन्प्रियते यन्न शृणोति तस्य मन एव तेजो गच्छति प्राणं प्राण एतद्वै ब्रह्म दीप्यते यन्मनसा ध्यायत्यथैतन्प्रियते यन्न ध्यायति तस्य प्राणमेव तेजो गच्छति प्राणं प्राणस्ता वा एताः सर्वा देवताः प्राणमेव प्रविश्य प्राणे मृता न मृच्छन्ते तस्मा देव उ पुनरुदीरते तद्यदिह वा एवं विद्वांस उभौ पर्वतावभिप्रवर्तेयातां तुस्तूर्षमाणौ दक्षिणश्चोत्तरश्च न हैवैनं स्तृण्वीयाताम्। अथ य एनं द्विषन्ति यांश्च स्वयं द्वेष्टि त एनं सर्वे परिप्रियन्ते ॥
पुरुष वाणी के द्वारा जो भी कुछ बोलता है, वह मानो ब्रह्म ही प्रकाशित हो रहा है। जब वह नहीं बोलता, उस समय 'वाक्' का तेज चक्षु को मिल जाता है, इस प्रकार प्राण का मिलन प्राण में हो जाता है। यह पुरुष चक्षु के माध्यम से जो भी कुछ देखता है, ऐसा लगता है कि ब्रह्म ही प्रकाशित हो रहा है। जब चक्षु से कुछ भी नहीं दिखाई देता, उस समय चक्षु का तेज श्रोत्र को मिल जाता है एवं प्राण प्राण में ही विलीन हो जाता है। यह जो भी कुछ श्रोत्र द्वारा श्रवण करता है, यह ऐसा प्रतीत होता है कि स्वयं ब्रह्म ही घोषित हो रहा है और जब यह श्रवण नहीं करता, उस समय उसका प्रकाश मन को प्राप्त हो जाता है तथा प्राण का प्राण में विलय हो जाता है। यह जो मन के द्वारा ध्यान करता है, यह मानो ब्रह्म ही घोषित हो रहा है और जब चिन्तन नहीं करता, तब उस समय मन का तेज भी प्राण में विलीन हो जाता है। इस तरह ये समस्त वाक्-इन्द्रिय आदि देवता प्राण में ही प्रवेश करके स्थित होते हैं। प्राण में विलीन होकर वे विनष्ट नहीं होते, इसलिए पुनः प्राण के द्वारा हो वे प्रकट होते हैं। उस दैव-परिमर अर्थात् प्राण का पूर्ण ज्ञान हो जाने के बाद यदि वे ज्ञानी पुरुष ऐसे दो ऊँचे पर्वतों को, जो पृथ्वी मण्डल के उत्तरी ध्रुव से लेकर दक्षिणी ध्रुव तक फैले हों, अपनी इच्छानुसार चलने के लिए प्रेरित करें, तो वे पर्वत इन विद्वान् श्रेष्ठ पुरुषों की आज्ञा की उपेक्षा नहीं कर सकते। इसके अतिरिक्त जो भी मनुष्य इस 'दैव परिमर' के जानकार श्रेष्ठ पुरुष से द्वेष-भाव करते हैं या फिर वह खुद ही जिनसे द्वेष रखता है, वे सब के सब सदैव के लिए विनष्ट हो जाते हैं।
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