पवित्रं स्त्रानशाीं च उत्तरासङ्गमेव च। यज्ञोपवीतं वेदांश्च सर्वं तद्वर्जयेद्यतिः ॥
कुश की बनी हुई पवित्री, स्नान के पश्चात् धारण करने वाले वस्त्र, उत्तरीय वस्त्र, यज्ञोपवीत तथा वेदाध्ययन आदि सभी का परित्याग कर दे।
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