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कठरुद्र • अध्याय 1 • श्लोक 45
अन्तःकरणसंबन्धात्प्रमातेत्यभिधीयते । तथा तवृत्तिसंबन्धात्प्रमाणमिति कथ्यते ॥
उसका अन्तःकरण से सम्बन्ध होने से वही प्रमाता (ज्ञाता) कहा जाता है। उसके चित्त द्वारा अनुभूति के सम्बन्ध से वह प्रमाण संज्ञा को प्राप्त होता है।
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