आनन्दयति दुःखान्यं जीवात्मानं सदा जनः । यदा होवैष एतस्मिन्त्रदृश्यत्वादिलक्षणे ॥
जो अदृश्यत्व आदि लक्षणों से युक्त इस पर-तत्त्व से अभेदरूप परम अद्वैतरूप ब्रह्म को प्राप्त कर लेता है,
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