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कठरुद्र • अध्याय 1 • श्लोक 23
ततः प्राणमयो ह्यात्मा विभिन्नश्चान्तरस्थितः । ततो मनोमयो ह्यात्मा विभिन्न श्चान्तरस्थितः ॥
उससे पृथक् एक प्राणमय आत्मा और है, जो कि इस अन्नमय आत्मा के अन्दर विद्यमान है। इससे भी सूक्ष्म और भिन्न मनोमय आत्मा है, जो प्राणमय के अन्दर स्थित है।
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