तद्विद्याविषयं ब्रह्म सत्यज्ञानसुखाद्वयम् । गंसारे च गुहावाच्ये मायाज्ञानादिसंज्ञिके ॥
वह सत्य-ज्ञान-आनन्द स्वरूप अद्वितीय ब्रह्म इस माया, अज्ञान एवं गुहा आदि नामों से कहे जाने वाले संसार में विद्यमान है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कठरुद्र के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।