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कठरुद्र • अध्याय 1 • श्लोक 15
तद्विद्याविषयं ब्रह्म सत्यज्ञानसुखाद्वयम् । गंसारे च गुहावाच्ये मायाज्ञानादिसंज्ञिके ॥
वह सत्य-ज्ञान-आनन्द स्वरूप अद्वितीय ब्रह्म इस माया, अज्ञान एवं गुहा आदि नामों से कहे जाने वाले संसार में विद्यमान है।
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