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कैवल्य • अध्याय 1 • श्लोक 26
अनेन ज्ञानमाप्रोति संसारार्णवनाशनम्। तस्मादेवं विदित्वैनं कैवल्यं पदमश्नुते कैवल्यं पदमश्श्रुत इति ॥
इससे उस विशेष ज्ञान की प्राप्ति होती है, जो ज्ञान भवसागर को नष्ट कर देता है। इस प्रकार इस उपनिषद् को ऐसा जानकर व्यक्ति कैवल्य फल को प्राप्त कर लेता है, कैवल्य पद को प्राप्त हो जाता है।
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