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कामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 21
स त्वमिष्ट्वा महायज्ञैः समृद्धैराप्तदक्षिणैः । कीर्तिं लोके परां प्राप्य गतिमग्र्यां गमिष्यसि ॥ इति श्रीमन्महाभारते अश्वमेधपर्वणि कृष्णधर्मराजसंवादे त्रयोदशोऽध्याये कामगीता समाप्ता ॥
इसलिये आप पर्याप्त दक्षिणा वाले समृद्धिशाली महायज्ञों का अनुष्ठान करके इस लोक में उत्तम कीर्ति और परलोक में श्रेष्ठ गति प्राप्त करेंगे।
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