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कामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 16
यो मां प्रयतते हन्तुं धृत्या सत्यपराक्रमः । भावो भवामि तस्याहं स च मां नावबुध्यते ॥
जो सत्यपराक्रमी पुरुष धैर्य के बल से मुझे नष्ट करने की चेष्टा करता है, उसके मानसिक भावों के साथ मैं इतना घुल-मिल जाता हूँ कि वह मुझे पहचान नहीं पाता।
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