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कामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 15
यो मां प्रयतते हन्तुं वेदैर्वेदान्तसाधनैः । स्थावरेष्विव भूतात्मा तस्य प्रादुर्भवाम्यहम् ॥
जो वेद और वेदान्त के स्वाध्यायरूप साधनों के द्वारा मुझे मिटा देने का सदा प्रयास करता है, उसके मन में मैं स्थावर प्राणियों में जीवात्मा की भाँति प्रकट होता हूँ।
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