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कामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 13
यो मां प्रयतते हन्तुं ज्ञात्वा प्रहरणे बलम् । तस्य तस्मिन्प्रहरणे पुनः प्रादुर्भवाम्यहम् ॥
जो मनुष्य अपने में अस्त्रबल की अधिकता का अनुभव करके मुझे नष्ट करने का प्रयत्न करता है, उसके उस अस्त्र-बल में मैं अभिमानरूप से पुन: प्रकट हो जाता हूँ।
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