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कामगीता • अध्याय 1 • श्लोक 12
अत्र गाथाः कामगीताः कीर्तयन्ति पुराविदः । श‍ृणु सङ्कीर्त्यमानास्ता अखिलेन युधिष्ठिर । काम उवाच । नाहं शक्योऽनुपायेन हन्तुं भूतेन केनचित् ॥
युधिष्ठिर! इस विषय में प्राचीन बातों के जानकार विद्वान्‌ एक पुरातन गाथा का वर्णन किया करते हैं, जो कामगीता कहलाती है। उसे मैं आपको सुनाता हूँ, सुनिये। काम का कहना है कि कोई भी प्राणी वास्तविक उपाय (निर्ममता और योगाभ्यास) का आश्रय लिये बिना मेरा नाश नहीं कर सकता है।
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